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mahabharat 12.78.34: यदि ब्राह्मण इन तीन अवसरों पर शस्त्र उठाता है - अपनी रक्षा के लिए, अन्य जातियों पर आने वाले अनिष्ट को रोकने के लिए, तथा अत्यन्त दुष्ट लोगों का दमन करने के लिए - तो उसे इसमें कोई दोष नहीं लगता ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.78.34 
ब्राह्मणस्त्रिषु कालेषु शस्त्रं गृह्णन्न दुष्यति।
आत्मत्राणे वर्णदोषे दुर्दम्यनियमेषु च॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
यदि ब्राह्मण इन तीन अवसरों पर शस्त्र उठाता है - अपनी रक्षा के लिए, अन्य जातियों पर आने वाले अनिष्ट को रोकने के लिए, तथा अत्यन्त दुष्ट लोगों का दमन करने के लिए - तो उसे इसमें कोई दोष नहीं लगता ॥ 34॥
 
If a Brahmin takes up arms on these three occasions - for his own protection, to stop any evil that is coming to the other castes, and to suppress the most wicked people - he is not blamed for it. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)