भवत्यधर्मो धर्मो हि धर्माधर्मावुभावपि।
कारणाद् देशकालस्य देशकाल: स तादृश:॥ ३२॥
अनुवाद
देश और काल की परिस्थिति के कारण कभी अधर्म धर्म बन जाता है और कभी धर्म अधर्म में परिणत हो जाता है; क्योंकि वही देश और काल है ॥32॥
Due to the circumstances of time and place, sometimes adharma becomes dharma and sometimes dharma transforms into adharma; because that is the place and time. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥