श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.78.23 
यदा छिनत्त्ययोऽश्मानमग्निश्चापोऽभिगच्छति।
क्षत्रं च ब्राह्मणं द्वेष्टि तदा नश्यन्ति ते त्रय:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब लोहा पत्थर को काट देता है, अग्नि जल के पास जाती है और क्षत्रिय ब्राह्मण से द्वेष करने लगता है, तब ये तीनों नष्ट हो जाते हैं ॥23॥
 
When iron cuts stone, fire goes near water and a Kshatriya starts hating a Brahmin, then all these three get destroyed. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)