श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.78.19 
युधिष्ठिर उवाच
अथ चेत् सर्वत: क्षत्रं प्रदुष्येद् ब्राह्मणं प्रति।
कस्तस्य ब्राह्मणस्त्राता को धर्म: किं परायणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! यदि क्षत्रिय समाज ही सब ओर से ब्राह्मणों के साथ दुर्व्यवहार करने लगे, तो कौन ब्राह्मण उस ब्राह्मण कुल की रक्षा कर सकेगा? उनके लिए धर्म (कर्तव्य) क्या है और उत्तम शरण क्या है?"॥19॥
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! If the Kshatriya community itself starts misbehaving with the Brahmins from all sides, then which Brahmin can protect that Brahmin clan? What is the Dharma (duty) for them and what is the great refuge?"॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)