श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.78.18 
उन्मर्यादे प्रवृत्ते तु दस्युभि: संकरे कृते।
सर्वे वर्णा न दुष्येयु: शस्त्रवन्तो युधिष्ठिर॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जब डाकू और चोर धर्म के नियमों का उल्लंघन करके अत्याचार करते हैं और लोगों में जाति-पाँति फैलाते हैं, तब यदि सभी जातियों के लोग इस अत्याचार को रोकने के लिए शस्त्र उठाएँ, तो उन्हें कोई दोष नहीं लगता॥ 18॥
 
Yudhishthira! When robbers and thieves violate the rules of religion and indulge in tyranny and spread caste-mixing among the people, then if people of all castes take up arms to stop this atrocity then there is no blame on them.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)