श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.78.15 
तेषां ये वेदबलिनस्तेऽभ्युत्थाय समन्तत:।
राज्ञो बलं वर्धयेयुर्महेन्द्रस्येव देवता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उनमें से जो ब्राह्मण वेद और शास्त्रों का बल रखते हैं, वे सब ओर से उठकर राजा को उसी प्रकार बल प्रदान करें, जैसे देवता इन्द्र को बल प्रदान करते हैं ॥15॥
 
Those Brahmins among them who have the strength of the Vedas and Shastras should rise from all sides and strengthen the king in the same way as the gods strengthen Indra. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)