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mahabharat 12.78.14: भीष्मजी बोले - राजन! ब्राह्मणों के समान सभी वर्णों को दान, तप, यज्ञ, प्राणियों के प्रति ईर्ष्या का अभाव तथा इन्द्रिय संयम द्वारा अपने कल्याण के लिए प्रयत्न करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.78.14 
भीष्म उवाच
दानेन तपसा यज्ञैरद्रोहेण दमेन च।
ब्राह्मणप्रमुखा वर्णा: क्षेममिच्छेयुरात्मन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन! ब्राह्मणों के समान सभी वर्णों को दान, तप, यज्ञ, प्राणियों के प्रति ईर्ष्या का अभाव तथा इन्द्रिय संयम द्वारा अपने कल्याण के लिए प्रयत्न करना चाहिए।
 
Bhishmaji said – King! All castes like Brahmins should strive for their own welfare through charity, penance, yagya, absence of jealousy towards living beings and control of senses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)