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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना
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श्लोक 31
श्लोक
12.75.31
दानेनान्यं बलेनान्यमन्यं सूनृतया गिरा।
सर्वत: प्रतिगृह्णीयाद् राज्यं प्राप्येह धार्मिक:॥ ३१॥
अनुवाद
राज्य प्राप्त करने से पहले धर्मात्मा राजा को चाहिए कि वह कुछ को दान से, कुछ को बल से और कुछ को मधुर वचनों से वश में कर ले ॥31॥
Before attaining the kingdom, a righteous king should subdue some by charity, some by force and some by sweet words. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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