श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.75.11 
सर्ववर्णै: सदा रक्ष्यं ब्रह्मस्वं ब्राह्मणा यथा।
न स्थेयं विषये तेन योऽपकुर्याद् द्विजातिषु॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सभी वर्णों के लोगों को ब्राह्मणों के धन की उसी प्रकार रक्षा करनी चाहिए, जिस प्रकार वे स्वयं ब्राह्मणों की रक्षा करते हैं। राजा को चाहिए कि वह ब्राह्मणों को कष्ट देने वाले किसी भी व्यक्ति को अपने राज्य में न रहने दे।॥11॥
 
People of all castes should protect the wealth of brahmanas in the same way as they protect the brahmanas themselves. The king should not allow anyone who troubles brahmanas to live in his kingdom.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)