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(तेषामर्थश्च कामश्च धर्मश्चेति विनिश्चय:।
श्लोकांश्चोशनसा गीतांस्तान् निबोध युधिष्ठिर॥
उच्छिष्ट: स भवेद् राजा यस्य नास्ति पुरोहित:।
अनुवाद
उनके धर्म, अर्थ और काम अवश्य सिद्ध होते हैं। युधिष्ठिर! इस विषय में शुक्राचार्य द्वारा गाये गए कुछ श्लोक हैं, उन्हें सुनो। जिस राजा के पास पुरोहित नहीं होता, वह अपवित्र हो जाता है।
Their Dharma, Artha and Kama are definitely accomplished. Yudhishthira! There are some verses sung by Shukracharya in this regard, listen to them. The king who does not have a priest becomes impure.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥