Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.73.8: कश्यप बोले - हे राजन! पुण्यात्मा पुरुष इस बात को जानते हैं कि संसार में जहाँ कहीं भी ब्राह्मण क्षत्रिय का विरोध करता है, वहाँ क्षत्रियों का राज्य छिन्न-भिन्न हो जाता है और लुटेरे अपनी सेना लेकर आकर राज्य पर अधिकार कर लेते हैं और वहाँ रहने वाले सभी जातियों के लोगों को अपनी प्रजा बना लेते हैं॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कश्यप बोले - हे राजन! पुण्यात्मा पुरुष इस बात को जानते हैं कि संसार में जहाँ कहीं भी ब्राह्मण क्षत्रिय का विरोध करता है, वहाँ क्षत्रियों का राज्य छिन्न-भिन्न हो जाता है और लुटेरे अपनी सेना लेकर आकर राज्य पर अधिकार कर लेते हैं और वहाँ रहने वाले सभी जातियों के लोगों को अपनी प्रजा बना लेते हैं॥8॥
Kasyapa said - O King! The virtuous men know this fact that wherever in the world a Brahmin opposes a Kshatriya, the kingdom of the Kshatriya is torn apart and the robbers come with their forces and take over the kingdom and make all the people of all castes residing there their subjects. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥