Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.73.24: पुरुरवा बोले—इस लोक में पृथ्वी पापियों और पुण्यात्माओं को समान रूप से धारण करती है। सूर्य भी सज्जनों और दुर्जनों को समान रूप से कष्ट देता है। वायु सज्जनों और दुर्जनों दोनों को स्पर्श करती है और जल, पापियों और पुण्यात्माओं दोनों को पवित्र करता है॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरुरवा बोले—इस लोक में पृथ्वी पापियों और पुण्यात्माओं को समान रूप से धारण करती है। सूर्य भी सज्जनों और दुर्जनों को समान रूप से कष्ट देता है। वायु सज्जनों और दुर्जनों दोनों को स्पर्श करती है और जल, पापियों और पुण्यात्माओं दोनों को पवित्र करता है॥ 24॥
Pururava said—In this world the earth bears sinners and virtuous souls alike. The sun also torments the good and the bad alike. The wind touches both the good and the wicked and water purifies both the sinners and the virtuous.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥