Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.73.2: हे राजन! जिन राजाओं के पुरोहित धर्मपरायण और मंत्रणा करने में कुशल होते हैं तथा जिनका राजा भी ऐसे गुणों से युक्त (धर्म में तत्पर और रहस्य को जानने वाला) होता है, वे राजा और उनकी प्रजा दोनों ही सब प्रकार से समृद्ध होते हैं॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! जिन राजाओं के पुरोहित धर्मपरायण और मंत्रणा करने में कुशल होते हैं तथा जिनका राजा भी ऐसे गुणों से युक्त (धर्म में तत्पर और रहस्य को जानने वाला) होता है, वे राजा और उनकी प्रजा दोनों ही सब प्रकार से समृद्ध होते हैं॥2॥
O King! Those kings whose priest is pious and skilled in giving advice and whose king is also endowed with such qualities (devoted to religion and knows the secrets), both those kings and their subjects prosper in every way. ॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥