श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.71.32 
स्वर्गलोके सुमहतीं श्रियं प्राप्स्यसि पाण्डव।
असम्भवश्च धर्माणामीदृशानामराजसु॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! धर्म का पालन करने से तुम्हें स्वर्ग में अपार सुख और धन की प्राप्ति होगी। जो राजा नहीं हैं, उनके लिए ऐसे धर्म का लाभ पाना असंभव है।॥32॥
 
O son of Pandu! By following the Dharma, you will get immense happiness and wealth in heaven. It is impossible for those who are not kings to get the benefit of such Dharma. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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