| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन » श्लोक 19 |
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| | | | श्लोक 12.71.19  | दोग्ध्री धान्यं हिरण्यं च मही राज्ञा सुरक्षिता।
नित्यं स्वेभ्य: परेभ्यश्च तृप्ता माता यथा पय:॥ १९॥ | | | | | | अनुवाद | | जिस प्रकार माता अपने बच्चे को तभी पर्याप्त दूध पिलाती है, जब वह स्वयं तृप्त हो जाती है, उसी प्रकार यह पृथ्वी भी दूध देने वाली गाय की तरह राजा के सम्बन्धियों तथा अन्य लोगों को तभी अन्न तथा सोना देती है, जब वह राजा से सुरक्षित रहती है। | | | | Just as a mother feeds her child with sufficient milk only when she herself is satisfied, similarly this Earth, like a milch-giving cow, always gives food and gold to the king's relatives and others only when it is safe from the king. | | ✨ ai-generated | | |
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