श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.71.18 
अथ राष्ट्रमुपायेन भुज्यमानं सुरक्षितम्।
जनयत्यतुलां नित्यं कोशवृद्धिं युधिष्ठिर॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! यदि राष्ट्र को न्यायपूर्वक सुरक्षित रखा जाए और उसका उपभोग किया जाए, अर्थात् उससे कर के रूप में धन लिया जाए, तो वह राजा के कोष को सदैव अद्वितीय रूप से बढ़ाता है ॥18॥
 
Yudhishthira! If the nation is kept safe by fair means and consumed, i.e., if wealth is taken from it in the form of taxes, then it always increases the treasury of the king in an unparalleled manner. ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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