श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.70.9 
अस्तब्ध: पूजयेन्मान्यान् गुरून् सेवेदमायया।
अर्चेद् देवानदम्भेन श्रियमिच्छेदकुत्सिताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
25- अहंकार त्यागो और माननीय लोगों का नम्रतापूर्वक आदर करो। 26- अपने गुरुओं की सेवा निष्कपटता से करो। 27- देवताओं की पूजा अभिमानरहित होकर करो। 28- सत्य के मार्ग से धन की इच्छा करो।॥9॥
 
25-Give up arrogance and respect honourable people with humility. 26-Serve your Gurus with sincerity. 27-Worship the Gods without any pride. 28-Desire wealth through honest means.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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