श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.70.8 
अनीर्षुर्गुप्तदार: स्याच्चोक्ष: स्यादघृणी नृप:।
स्त्रिय: सेवेत नात्यर्थं मृष्टं भुञ्जीत नाहितम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
21- उसे ईर्ष्या किए बिना अपनी पत्नी की रक्षा करनी चाहिए। 22- राजा को पवित्र रहना चाहिए, लेकिन किसी से घृणा नहीं करनी चाहिए। 23- उसे बहुत अधिक स्त्रियाँ नहीं रखनी चाहिए। 24- उसे शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन करना चाहिए, लेकिन हानिकारक भोजन नहीं करना चाहिए। 8.
 
21-He should protect his wife without being jealous. 22-The king should remain pure but should not hate anyone. 23-He should not have too many women. 24-He should eat pure and tasty food but should not eat harmful food. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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