श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.70.7 
नापरीक्ष्य नयेद् दण्डं न च मन्त्रं प्रकाशयेत्।
विसृजेन्न च लुब्धेभ्यो विश्वसेन्नापकारिषु॥ ७॥
 
 
अनुवाद
17- अपराध की उचित जांच किए बिना किसी को दंड न दें। 18- गुप्त चर्चाओं को उजागर न करें। 19- लालची लोगों को धन न दें। 20- उन लोगों पर भरोसा न करें जिन्होंने कभी आपका नुकसान किया हो। 7.
 
17-Do not punish anyone without properly investigating the crime. 18-Do not reveal secret discussions. 19-Do not give money to greedy people. 20-Do not trust those who have ever done harm to you. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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