श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.70.5 
संदधीत न चानार्यैर्विगृह्णीयान्न बन्धुभि:।
नाभक्तं चारयेच्चारं कुर्यात् कार्यमपीडया॥ ५॥
 
 
अनुवाद
9-दुष्टों की संगति न करो। 10-अपने संबंधियों से झगड़ा न करो। 11-ऐसे गुप्तचर के साथ काम न करो जो राजा के प्रति वफादार न हो। 12-किसी को नुकसान पहुँचाए बिना अपना काम करो। 5.
 
9-Do not associate with the wicked. 10-Do not fight with your relatives. 11-Do not work with a spy who is not loyal to the king. 12-Do your work without harming anyone. 5.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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