श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.70.4 
प्रियं ब्रूयादकृपण: शूर: स्यादविकत्थन:।
दाता नापात्रवर्षी स्यात् प्रगल्भ: स्यादनिष्ठुर:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
5- नम्र बने बिना मीठा बोलो। 6- बहादुर बनो, लेकिन घमंड मत करो। 7- दान दो, लेकिन अयोग्य को नहीं। 8- साहसी बनो, लेकिन क्रूर नहीं।
 
5-Speak sweetly without being humble. 6-Be a brave man, but do not boast. 7-Give charity, but not to the unworthy. 8-Be courageous, but not cruel.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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