श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.70.2 
भीष्म उवाच
अयं गुणानां षट्‍‍त्रिंशत् षट्‍‍त्रिंशद्‍गुणसंयुत:।
यान् गुणांस्तु गुणोपेत: कुर्वन् गुणमवाप्नुयात्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन! दया और उदारता जैसे गुणों से युक्त राजा छत्तीस प्रकार के गुणों को आचरण में लाकर सफलता प्राप्त कर सकता है। राजा को इन छत्तीस गुणों से परिपूर्ण होने का प्रयास करना चाहिए। 2॥
 
Bhishmaji said – King! There are thirty-six types of qualities which a king with qualities like kindness and generosity can bring into practice and achieve success. The king should try to be full of these thirty-six qualities. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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