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श्लोक 12.70.11  |
प्रहरेन्न त्वविज्ञाय हत्वा शत्रून् न शोचयेत्।
क्रोधं कुर्यान्न चाकस्मान्मृदु: स्यान्नापकारिषु॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| 33- बिना जाने किसी पर आक्रमण न करो। 34- शत्रुओं को मारकर शोक मत करो। 35- किसी पर अचानक क्रोध मत करो और 36- नम्र बनो, परन्तु उन लोगों के प्रति नहीं जो तुम्हारा अनिष्ट करते हैं।॥11॥ |
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| 33- Do not attack anyone without knowing. 34- Do not grieve after killing your enemies. 35- Do not suddenly become angry with anyone and 36- Be gentle, but not towards those who do you harm.॥ 11॥ |
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