श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.70.11 
प्रहरेन्न त्वविज्ञाय हत्वा शत्रून् न शोचयेत्।
क्रोधं कुर्यान्न चाकस्मान्मृदु: स्यान्नापकारिषु॥ ११॥
 
 
अनुवाद
33- बिना जाने किसी पर आक्रमण न करो। 34- शत्रुओं को मारकर शोक मत करो। 35- किसी पर अचानक क्रोध मत करो और 36- नम्र बनो, परन्तु उन लोगों के प्रति नहीं जो तुम्हारा अनिष्ट करते हैं।॥11॥
 
33- Do not attack anyone without knowing. 34- Do not grieve after killing your enemies. 35- Do not suddenly become angry with anyone and 36- Be gentle, but not towards those who do you harm.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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