श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.70.10 
सेवेत प्रणयं हित्वा दक्ष: स्यान्न त्वकालवित्।
सान्त्वयेन्न च मोक्षाय अनुगृह्णन्न चाक्षिपेत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
29- हठ छोड़कर प्रेम का पालन करो। 30- कार्य में कुशल बनो, किन्तु अवसर के ज्ञान से रहित मत बनो। 31- केवल किसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए किसी को सांत्वना या आश्वासन मत दो। 32- किसी पर दया दिखाते हुए उसकी निन्दा मत करो।॥10॥
 
29-Leave stubbornness and follow love. 30-Be efficient in work, but do not be devoid of knowledge of opportunity. 31-Do not console or assure anyone just to get rid of a problem. 32-Do not criticize anyone while showing kindness to them.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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