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श्लोक 12.70.10  |
सेवेत प्रणयं हित्वा दक्ष: स्यान्न त्वकालवित्।
सान्त्वयेन्न च मोक्षाय अनुगृह्णन्न चाक्षिपेत्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| 29- हठ छोड़कर प्रेम का पालन करो। 30- कार्य में कुशल बनो, किन्तु अवसर के ज्ञान से रहित मत बनो। 31- केवल किसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए किसी को सांत्वना या आश्वासन मत दो। 32- किसी पर दया दिखाते हुए उसकी निन्दा मत करो।॥10॥ |
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| 29-Leave stubbornness and follow love. 30-Be efficient in work, but do not be devoid of knowledge of opportunity. 31-Do not console or assure anyone just to get rid of a problem. 32-Do not criticize anyone while showing kindness to them.॥10॥ |
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