श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 70: राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.70.1 
युधिष्ठिर उवाच
केन वृत्तेन वृत्तज्ञ वर्तमानो महीपति:।
सुखेनार्थान् सुखोदर्कानिह च प्रेत्य चाप्नुयात्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे आचरण जानने वाले पितामह! किस प्रकार के आचरण से राजा इस लोक में तथा परलोक में भी सुख देने वाली वस्तुओं को सुगमतापूर्वक प्राप्त कर सकता है?
 
Yudhishthir asked – Grandfather who knows conduct! By what kind of conduct can the king easily obtain the things that give happiness in the future in this world as well as in the next world? 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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