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mahabharat 12.7.43-44h: कुरुनन्दन! आप इस स्वच्छ और समृद्ध पृथ्वी पर शासन करें। मुझे राज्य और भोगों से कोई सरोकार नहीं है। 43 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  12.7.43-44h 
प्रशाधि त्वमिमामुर्वीं क्षेमां निहतकण्टकाम्॥ ४३॥
न ममार्थोऽस्ति राज्येन भोगैर्वा कुरुनन्दन।
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! आप इस स्वच्छ और समृद्ध पृथ्वी पर शासन करें। मुझे राज्य और भोगों से कोई सरोकार नहीं है। 43 1/2॥
 
Kurunandan! You rule this clean and prosperous earth. I have nothing to do with kingdom and pleasures. 43 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)