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mahabharat 12.7.39: हे धनंजय! वह मोक्ष मार्ग को प्राप्त करता है और द्वैत से रहित बुद्धिमान एवं स्थिरचित्त मुनि तत्काल ब्रह्मदर्शन को प्राप्त कर लेता है। 39.   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.7.39 
प्राप्तवर्त्मा कृतमतिर्ब्रह्म सम्पद्यते तदा।
स धनंजय निर्द्वन्द्वो मुनिर्ज्ञानसमन्वित:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे धनंजय! वह मोक्ष मार्ग को प्राप्त करता है और द्वैत से रहित बुद्धिमान एवं स्थिरचित्त मुनि तत्काल ब्रह्मदर्शन को प्राप्त कर लेता है। 39.
 
O Dhananjaya! He attains the path to salvation and the wise and steady-minded sage, free from duality, immediately attains Brahman-Darshan. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)