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mahabharat 12.7.35-36h: हमने योद्धाओं को मारा, पाप किये और अपने ही देश को नष्ट किया। शत्रुओं को मारकर हमारा क्रोध तो दूर हो गया, परन्तु यह दुःख मुझे घेरे रहता है। 35 1/2।   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  12.7.35-36h 
हता: शूरा: कृतं पापं विषय: स्वो विनाशित:॥ ३५॥
हत्वा नो विगतो मन्यु: शोको मां रुन्धयत्ययम्।
 
 
अनुवाद
हमने योद्धाओं को मारा, पाप किये और अपने ही देश को नष्ट किया। शत्रुओं को मारकर हमारा क्रोध तो दूर हो गया, परन्तु यह दुःख मुझे घेरे रहता है। 35 1/2।
 
We killed warriors, committed sins and destroyed our own country. After killing the enemies, our anger has gone away, but this sorrow continues to surround me. 35 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)