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mahabharat 12.7.34-35h: अजेय राजाओं को मारकर हम संसार में निन्दनीय बन गए हैं। इस कुल के नाश करने वाले दुष्टबुद्धि और पापी दुर्योधन को इस राष्ट्र का अधिपति बनाकर राजा धृतराष्ट्र आज शोक की अग्नि में जल रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  12.7.34-35h 
अवध्यानां वधं कृत्वा लोके प्राप्ता: स्म वाच्यताम्।
कुलस्यास्यान्तकरणं दुर्मतिं पापपूरुषम्॥ ३४॥
राजा राष्ट्रेश्वरं कृत्वा धृतराष्ट्रोऽद्य शोचति।
 
 
अनुवाद
अजेय राजाओं को मारकर हम संसार में निन्दनीय बन गए हैं। इस कुल के नाश करने वाले दुष्टबुद्धि और पापी दुर्योधन को इस राष्ट्र का अधिपति बनाकर राजा धृतराष्ट्र आज शोक की अग्नि में जल रहे हैं।
 
By killing the invincible kings, we have become objects of condemnation in the world. King Dhritarashtra is burning in the fire of grief today after making the evil-minded and sinful Duryodhan, the destroyer of this clan, the ruler of this nation. 34 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)