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mahabharat 12.7.31: कौन भाई कुलीन होकर भी अपने मित्रों से ऐसी बातें कह सकता है, जैसी युद्ध की इच्छा रखने वाले दुर्योधन ने युद्धविराम के लिए गए हुए भगवान श्रीकृष्ण से कही थी? ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.7.31 
को हि बन्धु: कुलीन: संस्तथा ब्रूयात् सुहृज्जने।
यथासाववदद् वाक्यं युयुत्सु: कृष्णसंनिधौ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कौन भाई कुलीन होकर भी अपने मित्रों से ऐसी बातें कह सकता है, जैसी युद्ध की इच्छा रखने वाले दुर्योधन ने युद्धविराम के लिए गए हुए भगवान श्रीकृष्ण से कही थी? ॥31॥
 
Which brother, despite being of noble birth, can say such things to his friends as Duryodhan, who desired war, said to Lord Krishna when he had gone for a truce? ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)