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mahabharat 12.7.30: हम लोगों से सदैव द्वेष रखने वाला पापी दुर्योधन इन दोनों बूढ़ों को शोक की अग्नि में डालकर चला गया ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.7.30 
इमौ हि वृद्धौ शोकाग्नौ प्रक्षिप्य स सुयोधन:।
अस्मत्प्रद्वेषसंयुक्त: पापबुद्धि: सदैव ह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हम लोगों से सदैव द्वेष रखने वाला पापी दुर्योधन इन दोनों बूढ़ों को शोक की अग्नि में डालकर चला गया ॥30॥
 
Duryodhana, the sinful man who always had hatred towards us, left these two old men in the fire of grief. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)