Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.7.3: युधिष्ठिर बोले, 'अर्जुन! यदि हम लोग वृष्णि और अंधक वंशी क्षत्रियों की नगरी द्वारका में जाकर भिक्षाटन करके अपनी जीविका चलाते, तो आज हमें अपने कुल का नाश करके यह दुर्दशा न देखनी पड़ती। | mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर बोले, 'अर्जुन! यदि हम लोग वृष्णि और अंधक वंशी क्षत्रियों की नगरी द्वारका में जाकर भिक्षाटन करके अपनी जीविका चलाते, तो आज हमें अपने कुल का नाश करके यह दुर्दशा न देखनी पड़ती।
Yudhishthira said, 'Arjun! If we had gone to Dwarka, the city of Vrishni and Andhak clan Kshatriyas, and had earned our livelihood by begging, then we would not have had to face this plight today after destroying our family.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥