श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.7.24 
न सकामा वयं ते च न चास्माभिर्न तैर्जितम्।
न तैर्भुक्तेयमवनिर्न नार्यो गीतवादितम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस युद्ध से न तो हमारी इच्छाएँ पूरी हुईं और न कौरवों की ही। न हम जीते, न वे। न उन्होंने इस पृथ्वी का भोग किया, न स्त्री-सुख का अनुभव किया, न गीत-संगीत का आनन्द लिया॥ 24॥
 
Neither our wishes were fulfilled by this war nor those of the Kauravas were successful. Neither we won, nor they. They neither enjoyed this earth, nor experienced the happiness of women, nor enjoyed music and music.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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