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mahabharat 12.7.2: वे शोक और शोक से भरकर बार-बार गहरी साँस लेने लगे और शोक से पीड़ित अर्जुन को देखकर इस प्रकार बोले।   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.7.2 
आविष्टो दु:खशोकाभ्यां नि:श्वसंश्च पुन: पुन:।
दृष्ट्वार्जुनमुवाचेदं वचनं शोककर्शित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे शोक और शोक से भरकर बार-बार गहरी साँस लेने लगे और शोक से पीड़ित अर्जुन को देखकर इस प्रकार बोले।
 
Filled with grief and sorrow, he began to draw deep breaths repeatedly and on seeing Arjuna, stricken with grief, spoke as follows. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)