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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना
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श्लोक 13
श्लोक
12.7.13
बहुकल्याणसंयुक्तानिच्छन्ति पितर: सुतान्।
तपसा ब्रह्मचर्येण सत्येन च तितिक्षया॥ १३॥
अनुवाद
सभी पिता तप, ब्रह्मचर्य, सत्यभाषण और तितिक्षा आदि उपायों से अनेक शुभ गुणों वाले बहुत से पुत्रों की कामना करते हैं ॥13॥
All fathers want to have many sons with many auspicious qualities through the means of penance, celibacy, speaking the truth and Titiksha etc. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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