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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन
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श्लोक 32
श्लोक
12.69.32
एते गुणा: समस्ता: स्युर्नृपस्य सततं स्थिरा:।
व्यवहारलोपे नृपते: कुत: स्वर्ग: कुतो यश:॥ ३२॥
अनुवाद
ये सब गुण राजा में सदैव स्थिर रहने चाहिए। यदि राजा का धर्ममय आचरण नष्ट हो जाए, तो वह स्वर्ग और यश कैसे प्राप्त कर सकता है?॥ 32॥
All these qualities should always remain stable in a king. If the just conduct of a king is lost, then how can he attain heaven and fame?॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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