श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.68.8 
बृहस्पतिरुवाच
राजमूलो महाप्राज्ञ धर्मो लोकस्य लक्ष्यते।
प्रजा राजभयादेव न खादन्ति परस्परम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पतिजी बोले- हे मुनि! संसार में जो धर्म है, उसका मूल कारण राजा ही है। राजा के भय से ही प्रजा एक-दूसरे का अधिकार नहीं छीनती।
 
Brihaspatiji said- O great sage! The king is the root cause of the religion that is observed in the world. It is only because of the fear of the king that the subjects do not usurp one another. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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