श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.68.33 
धर्ममेव प्रपद्यन्ते न हिंसन्ति परस्परम्।
अनुगृह्णन्ति चान्योन्यं यदा रक्षति भूमिप:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजा जब रक्षा करता है, तब सब लोग धर्म का पालन करते हैं, कोई किसी को कष्ट नहीं पहुँचाता और सब लोग एक दूसरे पर दया करते हैं ॥33॥
 
When the king protects, everyone follows the Dharma, no one harms anyone and everyone is kind to one another. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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