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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन
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श्लोक 31
श्लोक
12.68.31
नाक्रुष्टं सहते कश्चित् कुतो वा हस्तलाघवम्।
यदि राजा न सम्यग् गां रक्षयत्यपि धार्मिक:॥ ३१॥
अनुवाद
यदि धर्मात्मा राजा पृथ्वी की अच्छी तरह रक्षा नहीं करता, तो कोई भी मनुष्य गाली या मार खाने का अपमान कैसे सहन कर सकता है? ॥31॥
If a righteous king does not protect the earth well, then how can any man endure the humiliation of being abused or beaten? ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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