श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.68.1 
युधिष्ठिर उवाच
किमाहुर्दैवतं विप्रा राजानं भरतर्षभ।
मनुष्याणामधिपतिं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे भरतपितामह! ब्राह्मण लोग जो राजा हैं, जो सब मनुष्यों के शासक हैं, उन्हें भगवान का रूप क्यों कहते हैं? कृपा करके मुझे यह बताइए॥1॥
 
Yudhishthira asked - O great grandfather of Bharata! Why do the Brahmins call the king who is the ruler of all human beings as a form of God? Kindly tell me this.॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd