Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.63.23: हे यथेष्ट दक्षिणा देने वाले राजा सिंह! भिक्षाटन का यह कर्तव्य क्षत्रिय आदि तीनों वर्णों के लिए नित्य या अनिवार्य कर्तव्य नहीं है। चारों आश्रमों के निवासियों का कर्तव्य उनके लिए ऐच्छिक कहा गया है। | mahabharat अध्याय 12.63: वर्णाश्रमधर्मका वर्णन तथा राजधर्मकी श्रेष्ठता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चैतन्नैष्ठिकं कर्म त्रयाणां भूरिदक्षिण।
चतुर्णां राजशार्दूल प्राहुराश्रमवासिनाम्॥ २३॥
अनुवाद
हे यथेष्ट दक्षिणा देने वाले राजा सिंह! भिक्षाटन का यह कर्तव्य क्षत्रिय आदि तीनों वर्णों के लिए नित्य या अनिवार्य कर्तव्य नहीं है। चारों आश्रमों के निवासियों का कर्तव्य उनके लिए ऐच्छिक कहा गया है।
O King Singh, who gives sufficient dakshina! This duty of begging is not a daily or compulsory duty for the three Varnas (castes) like Kshatriya etc. The duty of the residents of the four Ashramas is said to be optional for them. 23.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥