Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.63.2: यदि बुद्धिमान ब्राह्मण गृहस्थ हो, तो उसके लिए वेदाध्ययन तथा यज्ञ आदि छह कर्म ही उपयुक्त हैं। गृहस्थ जीवन का उद्देश्य पूरा करने के बाद ब्राह्मण के लिए वन में (वानप्रस्थ होकर) रहना ही श्रेष्ठ माना गया है।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.63: वर्णाश्रमधर्मका वर्णन तथा राजधर्मकी श्रेष्ठता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 63: वर्णाश्रमधर्मका वर्णन तथा राजधर्मकी श्रेष्ठता  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.63.2 
सेव्यं तु ब्रह्म षट्कर्म गृहस्थेन मनीषिणा।
कृतकृत्यस्य चारण्ये वासो विप्रस्य शस्यते॥ २॥
 
 
अनुवाद
यदि बुद्धिमान ब्राह्मण गृहस्थ हो, तो उसके लिए वेदाध्ययन तथा यज्ञ आदि छह कर्म ही उपयुक्त हैं। गृहस्थ जीवन का उद्देश्य पूरा करने के बाद ब्राह्मण के लिए वन में (वानप्रस्थ होकर) रहना ही श्रेष्ठ माना गया है।॥2॥
 
If a wise Brahmin is a householder, then only the six acts like study of Vedas and Yajna-Yajna etc. are suitable for him. After completing the purpose of the household life, it is considered best for a Brahmin to live in the forest (by becoming a Vanaprasthi).॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)