क्षात्राणि वैश्यानि च सेवमान:
शौद्राणि कर्माणि च ब्राह्मण: सन्।
अस्मिँल्लोके निन्दितो मन्दचेता:
परे च लोके निरयं प्रयाति॥ ४॥
अनुवाद
जो ब्राह्मण होकर क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों के कर्मों में लिप्त रहता है, वह मंदबुद्धि मनुष्य इस लोक में निन्दित होकर परलोक में नरक को प्राप्त होता है॥4॥
The one who, being a Brahmin, indulges in the deeds of Kshatriyas, Vaishyas and Shudras, is a dull-witted person who is condemned in this world and goes to hell in the next world. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥