श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 6: युधिष्ठिरकी चिन्ता, कुन्तीका उन्हें समझाना और स्त्रियोंको युधिष्ठिरका शाप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.6.4 
युधिष्ठिर महाबाहो नैनं शोचितुमर्हसि।
जहि शोकं महाप्राज्ञ शृणु चेदं वचो मम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु युधिष्ठिर! आपको कर्ण के लिए शोक नहीं करना चाहिए। महामते! शोक करना छोड़िए और मेरी बात सुनिए।॥4॥
 
‘Mahabahu Yudhishthira! You should not mourn for Karna. Mahamate! Stop mourning and listen to me.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)