श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  12.59.97 
तस्मान्निषादा: सम्भूता: क्रूरा: शैलवनाश्रया:।
ये चान्ये विन्ध्यनिलया म्लेच्छा: शतसहस्रश:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
उसी से पर्वतों और वनों में रहने वाले क्रूर निषाद उत्पन्न हुए और विन्ध्य पर्वतों में रहने वाले लाखों म्लेच्छ भी उत्पन्न हुए ॥97॥
 
From that, the cruel Nishadas who lived in the mountains and forests were born, and also the millions of Mlecchas who lived in the Vindhya mountains. ॥97॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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