श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  12.59.80 
ततस्तां भगवान् नीतिं पूर्वं जग्राह शङ्कर:।
बहुरूपो विशालाक्ष: शिव: स्थाणुरुमापति:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान शंकर ने सर्वप्रथम इस नीति को स्वीकार किया। वे बहुरूप, विशालाक्ष, शिव, स्थाणु, उमापति आदि नामों से प्रसिद्ध हैं ॥80॥
 
Thereafter, Lord Shankar first accepted this ethics. He is famous by the names Bahuroop, Vishalaksh, Shiva, Sthanu, Umapati etc. 80॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas