श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  12.59.79 
षाड्गुण्यगुणसारैषा स्थास्यत्यग्रे महात्मसु।
धर्मार्थकाममोक्षाश्च सकला ह्यत्र शब्दिता:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
यह ज्ञान संधि-विग्रह आदि छः गुणों का सार है। महात्माओं में इसका स्थान सर्वोपरि होगा। इस शास्त्र में जीवन के चार पुरुषार्थ - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - बताए गए हैं।॥ 79॥
 
‘This knowledge is the essence of the six qualities like Sandhi-Vigrah etc. It will have the foremost place among the great souls. In this scripture, the four aims of life – Dharma, Artha, Kama and Moksha – have been explained.’॥ 79॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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