श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  12.59.72 
धर्मश्चार्थश्च कामश्च मोक्षश्चात्रानुवर्णिता:।
उपायाश्चार्थलिप्सा च विविधा भूरिदक्षिण॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रचुर दक्षिणा देने वाले युधिष्ठिर! इस ग्रन्थ में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, उनकी प्राप्ति के उपाय तथा नाना प्रकार के अर्थ-वासनाओं का भी वर्णन है ॥72॥
 
Yudhishthir, the one who gives abundant dakshina! In this book, there is also a description of religion, artha, kama and moksha, the ways to achieve them and various types of wealth-lust. 72॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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