श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.59.70 
रक्षणं चैव पौराणां राष्ट्रस्य च विवर्धनम्।
मण्डलस्था च या चिन्ता राजन् द्वादशराजिका॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
राजन! इस ग्रंथ में प्रजा की रक्षा, राज्य की वृद्धि तथा बारह राज्यों के विषय में भी विचार किया गया है ॥70॥
 
Rajan! The thoughts regarding the protection of the natives, the growth of the state and the twelve kingdoms have also been mentioned in this book. 70॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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