श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  12.59.68 
प्रत्यक्षाश्च परोक्षाश्च सर्वाधिकरणेष्वथ।
वृत्तेर्भरतशार्दूल नित्यं चैवान्ववेक्षणम्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
भरतवंश के सिंह युधिष्ठिर! सभी दरबारों में होने वाली प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष चर्चाओं तथा वहाँ के राजपुरुषों के आचरण का प्रतिदिन अवलोकन करना चाहिए। इसका भी उल्लेख उपरोक्त शास्त्र में है। 68।
 
Yudhishthira, the lion of the Bharata dynasty! The direct and indirect discussions that take place in all courts and the behaviour of the royal men there should be observed daily. This too is mentioned in the above scripture. 68.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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